Thursday, July 29, 2010

राहे

गुजरे है हम उन राहों से
जिन पर मौत भी जाने से घबराती है
ये उन राहों की बात है
जिनका नाम लेके दुनिया हमें डराती है
वो राहे जो कांटो का एहसास कराती है
वो राहे जो मंजिल तक नहीं पहुचाती है
वो राहे जो सुनसान है
वो राहे जिनसे हर शख्स परेशान है
वो राहे जिनमे दुखो का मेला लगता है
वो राहे जहा दोस्त भी दुश्मन लगता है
वो राहे जो तैयार है
इंसान को बर्बाद करने के लिए
वो राहे जिन पर गम मिलते है
उन राहों पर हम मिलते है
 सिर्फ हम
 

4 comments:

  1. भई मेरे, चल तो दिए पर पहुंचे कहाँ? ये नहीं बताया....

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  2. dost in raaho ki koi manjil nahi hai

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  3. bhut badiya,dil ko chugayi

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