गुजरे है हम उन राहों से
जिन पर मौत भी जाने से घबराती है
ये उन राहों की बात है
जिनका नाम लेके दुनिया हमें डराती है
वो राहे जो कांटो का एहसास कराती है
वो राहे जो मंजिल तक नहीं पहुचाती है
वो राहे जो सुनसान है
वो राहे जिनसे हर शख्स परेशान है
वो राहे जिनमे दुखो का मेला लगता है
वो राहे जहा दोस्त भी दुश्मन लगता है
वो राहे जो तैयार है
इंसान को बर्बाद करने के लिए
वो राहे जिन पर गम मिलते है
उन राहों पर हम मिलते है
जिन पर मौत भी जाने से घबराती है
ये उन राहों की बात है
जिनका नाम लेके दुनिया हमें डराती है
वो राहे जो कांटो का एहसास कराती है
वो राहे जो मंजिल तक नहीं पहुचाती है
वो राहे जो सुनसान है
वो राहे जिनसे हर शख्स परेशान है
वो राहे जिनमे दुखो का मेला लगता है
वो राहे जहा दोस्त भी दुश्मन लगता है
वो राहे जो तैयार है
इंसान को बर्बाद करने के लिए
वो राहे जिन पर गम मिलते है
उन राहों पर हम मिलते है
सिर्फ हम

भई मेरे, चल तो दिए पर पहुंचे कहाँ? ये नहीं बताया....
ReplyDeletedost in raaho ki koi manjil nahi hai
ReplyDeletebhut badiya,dil ko chugayi
ReplyDeletebahut hi pyara likha hai aapne.. acha laga pad kar...
ReplyDeleteMeri nayi kavita : Tera saath hi bada pyara hai..(तेरा साथ ही बड़ा प्यारा है ..)
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