फिर वही मंजर
फिर वही शांम
हर और बिखरा है देखो
मौत का सामान
सहमा सहमा सा है
हर शख्स यहाँ
है डर सीने में उसके
की जाए कहा
हर और खून से लथपथ
पड़े हुए है लोग
ये कैसा भयानक मंजर है
किसका है ये दोष
वो मॉस का लोथड़ा बन
पड़ा हुआ है किसी का बाप
वो भाई देख रहा है देखो
खून से लथपथ बहन की लाश
वो रोता बच्चा ढूँढ रहा है
माँ को अपनी यहाँ वहा
वो दादा सोचे खड़ा खड़ा
पोता मेरा गया कहा
चीखती चिल्लाती आवाजे
हर और सुनाई पड़ रही
अपने ही शहर में हमको अपनी
जान पराई लग रही
हर और धुआ ही धुआ है
और है धमाको की गूँज
इस धुए में बोझल हो गयी
जैसे जिंदगी की धूप
इस धुए में बोझल हो गयी
जैसे जिंदगी की धूप
फिर वही शांम
हर और बिखरा है देखो
मौत का सामान
सहमा सहमा सा है
हर शख्स यहाँ
है डर सीने में उसके
की जाए कहा
हर और खून से लथपथ
पड़े हुए है लोग
ये कैसा भयानक मंजर है
किसका है ये दोष
वो मॉस का लोथड़ा बन
पड़ा हुआ है किसी का बाप
वो भाई देख रहा है देखो
खून से लथपथ बहन की लाश
वो रोता बच्चा ढूँढ रहा है
माँ को अपनी यहाँ वहा
वो दादा सोचे खड़ा खड़ा
पोता मेरा गया कहा
चीखती चिल्लाती आवाजे
हर और सुनाई पड़ रही
अपने ही शहर में हमको अपनी
जान पराई लग रही
हर और धुआ ही धुआ है
और है धमाको की गूँज
इस धुए में बोझल हो गयी
जैसे जिंदगी की धूप
इस धुए में बोझल हो गयी
जैसे जिंदगी की धूप
Bahut Khoob!
ReplyDeleteDard ko bakhoobi ukera hai shabdon mein aapne!
बेहतरीन अभिव्यक्ति!
ReplyDeleteyatharth ka achha chitran kiya hai..
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