Tuesday, April 13, 2010

बदनाम

क्या मिला है तुझे दिल मेरा तोड़कर
यु तन्हा अकेला मुझे छोड़कर
करके यु सितम मेरे दिल पे सनम
जा रही है तू क्यू मुझको छोड़कर
जा तू चाहे जहा भी चली जायेगी
याद मेरी तुझे पल - पल तडपाएगी
जो मैं तडपूंगा रातो को तेरे लिए
चैन से तू भी न सो पाएगी
तड़पेगी तू भी करवटे बदलेगी
तू बता कैसे मुझको तू भूलेगी
जलेगी कभी, कभी भुझ जायेगी
ए - शमां बिन परवाने क्या कर पाएगी
रुसवा तुझको आज मैं कर जाऊंगा
मेरा क्या है मैं तो मर जाऊँगा
मौत का मेरी इल्जाम होगा तुझ पर
बेवफा तुझको बदनाम कर जाऊँगा !

4 comments:

  1. Yaar koi extreme step mat uthana! Hahaa...
    Experience se keh raha hoon!
    Jo bhi pyar se mila hum usi ke ho liye....
    Aur,
    Main zindagi ka saath nibhata chala gaya...
    Bas in do gano ki tarz pe jiyo, khush raho aur khush karo!
    Waise kavita acchi hai!

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  2. अच्छी लगी आप की रचना जो मोहब्बत के एक और पहलू पर बात करती है."सच में" पर आने और पसंद करने के लिये धन्यवाद!

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  3. बल्ले सैनी जी ......शम्मा ....परवाने ......!!

    मोहब्बत हो गयी जिनको
    वो दीवाने कहाँ जायें ......??

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  4. Bada tadap ke likha hai...!

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