Friday, February 5, 2010

तन्हाई

जिन्दगी की हर शाम

गुजरती है तन्हाई में

रोता हू उस वक़्त

जब तू याद आती है

रुसवाई में

कैसे तुझसे मैं कहू

तू आजा

तू आजा मेरी बाहों में

मैं अकेला शायद इस

तन्हाई से न लड़ पाउगां

तू न आई तो तेरी कसम

मैं आज मर जाऊँगा

वो गलिया पुकारती है

वो राहे याद करती है

तुझको मेरी तन्हाई में

सारी दुनिया देखती है

मुझको रोता देखकर

सारी दुनिया रोती है

अब तो मेरी तन्हाई में भी

बाते तेरी होती है

रात दिन जिंदगी के

इस तरह कटते है

याद में तेरी हम तो

हर बार जीते मरते है

बाते करना चाहे तुझसे

तो बाते नहीं होती है

इन तन्हाइयो में अक्सर

मेरी आँखे रोती है

तन्हाई में ये दिल

तुझको पुकारता है

महफ़िल में भी बस तेरा

इंतज़ार करता है

तुम आ जाओ तो

ये तन्हाई महक उठेगी

जिंदगी फिर से मेरी

चहक उठेगी

मेरी तन्हाइयो को

सिर्फ तेरा इंतज़ार है

आजा मेरी जान

मुझको सिर्फ तुझसे प्यार है

मुझको सिर्फ तुझसे प्यार है ........

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