जिन्दगी की हर शाम
गुजरती है तन्हाई में
रोता हू उस वक़्त
जब तू याद आती है
रुसवाई में
कैसे तुझसे मैं कहू
तू आजा
तू आजा मेरी बाहों में
मैं अकेला शायद इस
तन्हाई से न लड़ पाउगां
तू न आई तो तेरी कसम
मैं आज मर जाऊँगा
वो गलिया पुकारती है
वो राहे याद करती है
तुझको मेरी तन्हाई में
सारी दुनिया देखती है
मुझको रोता देखकर
सारी दुनिया रोती है
अब तो मेरी तन्हाई में भी
बाते तेरी होती है
रात दिन जिंदगी के
इस तरह कटते है
याद में तेरी हम तो
हर बार जीते मरते है
बाते करना चाहे तुझसे
तो बाते नहीं होती है
इन तन्हाइयो में अक्सर
मेरी आँखे रोती है
तन्हाई में ये दिल
तुझको पुकारता है
महफ़िल में भी बस तेरा
इंतज़ार करता है
तुम आ जाओ तो
ये तन्हाई महक उठेगी
जिंदगी फिर से मेरी
चहक उठेगी
मेरी तन्हाइयो को
सिर्फ तेरा इंतज़ार है
आजा मेरी जान
मुझको सिर्फ तुझसे प्यार है
मुझको सिर्फ तुझसे प्यार है ........

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