आप सभी को गणतंत्र दिवस की बधाईया, इस गणतंत्र दिवस पर आप सभी के लिए मेरी ओर से एक छोटी सी पेशकश .....
सिर्फ उठो नहीं, आज हमें जागना है
हवाओं के विपरीत आज हमें जाना है
जरूरत है अब बदलाव की
बदल दो प्रक्रिया ठहराव की
सिर्फ कुछ नहीं बहुत कुछ कर दिखाना है
देशभक्ति के राग में अपना राग मिलाना है
आधुनिकता की इस दौड़ में एक पहचान हमें बनानी है
आधुनिकता की इस दौड़ में एक पहचान हमें बनानी है
कितनी ताकत है हममे सारी दुनिया को दिखानी है
अपने देश को शिखर पर लेकर हमको जाना है
अपनी ताकत का लोहा सारी दुनिया को मनवाना है
आज जरूरत है गणतंत्र को हमारी
पीछे ना हटेंगे चाहे चली जाए जान हमारी
देश के लिए मर मिटना भी हमको गंवारा है
अपनी मिट्टी के लिए खून अपना बहाना है
तो आओ मिलकर चले और थामे एक दूजे का हाथ
जो छूट गए है पीछे लाये उनको अपने साथ
बस एक दूजे को ऐसे ही हमको संभालना है
अपना मुल्क अब हमको ही संवारना है
अपना मुल्क अब हमको ही संवारना है...

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